60 की उम्र में भी रहेंगे जवान! वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला तरीका

नई रिसर्च के अनुसार अगर आप हर रात बहुत कम या बहुत ज्यादा सोते हैं, तो इसका असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता. वैज्ञानिकों का कहना है कि गलत स्लीप पैटर्न शरीर के कई अंगों को तेजी से बूढ़ा बना सकता है. यह रिसर्च जर्नल Nature में 13 मई को प्रकाशित हुई. स्टडी में पाया गया कि कम नींद और ज्यादा नींद दोनों ही दिमाग, दिल, फेफड़ों और इम्यून सिस्टम की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं. रिसर्च के मुताबिक सबसे कम जोखिम उन लोगों में देखा गया जो रोजाना लगभग 6.4 से 7.8 घंटे की नींद लेते हैं. इस स्टडी को Columbia University के रेडियोलॉजी असिस्टेंट प्रोफेसर Junhao Wen ने लीड किया. उन्होंने कहा कि यह रिसर्च दिखाती है कि सही मात्रा में नींद लेना पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद जरूरी है. रिसर्च टीम ने मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से शरीर के 17 अलग-अलग ऑर्गन सिस्टम के लिए 23 “बायोलॉजिकल क्लॉक” तैयार किए. इन क्लॉक्स ने मेडिकल स्कैन, ब्लड टेस्ट और प्रोटीन डेटा के जरिए यह मापा कि किसी इंसान के अंग उसकी असली उम्र की तुलना में कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं. इसके लिए ब्रिटेन के करीब 5 लाख लोगों के हेल्थ डेटा का विश्लेषण किया गया.

रिसर्च में एक “U-shaped pattern” देखने को मिला. यानी जो लोग 6 घंटे से कम सोते थे और जो लोग 8 घंटे से ज्यादा सोते थे, दोनों में तेजी से एजिंग के संकेत मिले. वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 7 घंटे की नींद शरीर के लिए सबसे हेल्दी मानी गई. इसी रेंज में शरीर के अंग सबसे बेहतर स्थिति में पाए गए. स्टडी बताती है कि नींद सिर्फ आराम का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह शरीर के लगभग हर सिस्टम से जुड़ी हुई है. रिसर्च के मुताबिक कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा देखा गया. इसके अलावा बहुत कम और बहुत ज्यादा नींद लेने वाले लोगों में फेफड़ों की बीमारियां जैसे COPD और अस्थमा का खतरा भी बढ़ा हुआ मिला. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि खराब स्लीप पैटर्न पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे एसिड रिफ्लक्स को भी बढ़ा सकता है.

रिसर्च टीम ने बुजुर्ग लोगों में डिप्रेशन और नींद के रिश्ते को भी समझने की कोशिश की. स्टडी में सामने आया कि कम नींद सीधे तौर पर डिप्रेशन को बढ़ा सकती है. वहीं ज्यादा नींद लेने वालों में दिमाग और शरीर की चर्बी में बदलाव के जरिए मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका मतलब यह है कि कम और ज्यादा सोने वाले लोगों के इलाज और हेल्थकेयर की जरूरतें अलग हो सकती हैं.

रिसर्च यह साबित नहीं करती कि सिर्फ नींद ही तेजी से बूढ़ा होने की वजह है. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि स्लीप हैबिट्स शरीर की सेहत पर गहरा असर डालती हैं और उम्र बढ़ने के साथ यह और महत्वपूर्ण हो जाती हैं. रिसर्चर Junhao Wen का कहना है कि नींद हमारे पूरे शरीर की फिजियोलॉजी से जुड़ी हुई है और इसका असर शरीर के लगभग हर हिस्से पर पड़ता है. यही वजह है कि सही मात्रा में नींद लेना सिर्फ फिट रहने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक जवान और स्वस्थ रहने के लिए भी जरूरी माना जा रहा है.