सूर्य ग्रहण के साथ टूटेंगे हजारों तारे, आसमान में हजारों सालों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

अंतरिक्ष में एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। 12 अगस्त को आसमान में एक साथ दो अद्भुत खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी और सबसे खास बात ये है कि इन्हें देखने के लिए आपको किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होगी। 12 अगस्त के दिन चांद सीधे सूरज के सामने से गुजरेगा जिससे उत्तरी अमेरिका, यूके, आयरलैंड और यूरोप के मुख्य हिस्सों में एक शानदार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। फिर जैसे ही सूरज डूबेगा और रात होगी पृथ्वी एक धूमकेतु की तरफ से छोड़े गए मलबे से गुजरेगी जिससे साल की सबसे बेहतरीन उल्का वर्षा भी देखने को मिलेगी। यह घटना दो अलग-अलग खगोलीय नजारों का एक ही दिन मेल है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ‘कॉस्मिक डबल व्हैमी’ यानि एक ही दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण और उल्का बौछार होना एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना है जो इंसानी जीवनकाल में कभी-कभार ही देखने को मिलती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा संयोग सैकड़ों या हजारों सालों में एक बार बनता है।

12 अगस्त को चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा। इससे दिन के समय कुछ मिनटों के लिए शाम जैसा अंधेरा छा जाएगा। इसी रात पृथ्वी, स्विफ्ट-टटल धूमकेतु के मलबे से होकर गुजरेगी। जब धूल के ये छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में टकराएंगे तो वे जल उठेंगे जिससे आसमान में चमकदार लकीरें बनेंगी जिन्हें हम ‘टूटता तारा’ या उल्का बौछार कहते हैं।

सूर्य ग्रहण हमेशा ‘अमावस्या’ के दिन ही होता है। अमावस्या होने के कारण रात को आसमान एकदम काला और चांद की रोशनी से मुक्त रहेगा। इस वजह से रात में छोटे और हल्के टूटते तारे भी बेहद स्पष्ट और चमकदार दिखाई देंगे।

इसे कहां और कैसे देख सकते हैं?
पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य रास्ता ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर और उत्तरी स्पेन से होकर गुजरेगा। अगर आप इन जगहों पर हैं तो आपको दिन में पूर्ण अंधेरा दिखाई देगा।
आंशिक सूर्य ग्रहण बाकी बचे यूरोप जैसे यूके, आयरलैंड, उत्तरी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका यानि कनाडा और उत्तर-पूर्वी अमेरिका में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा। यहां ऐसा लगेगा कि चंद्रमा ने सूरज का एक बड़ा हिस्सा ‘काट’ लिया है।
भारत में क्या सूर्य ग्रहण दिखेगा?- भारत में इस सूर्य ग्रहण को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा क्योंकि उस समय यहां रात हो रही होगी। हालांकि आप इसे विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं के ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के जरिए देख पाएंगे।

उल्का बौछार कहां और कैसे देखें?
सूर्य ग्रहण के विपरीत, पर्सीड उल्का बौछार को उत्तरी गोलार्ध के ज्यादातर हिस्सों से देखा जा सकता है बशर्ते मौसम साफ हो। 12 अगस्त की देर रात से लेकर 13 अगस्त की सुबह का समय इसे देखने के लिए सबसे बेहतर है। इस दौरान प्रति घंटे 60 से 100 तक टूटते तारे देखे जा सकते हैं।

उल्कों की बौछार कैसे देखें?- इसके लिए आपको किसी टेलीस्कोप या दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। शहर की तेज लाइटों से दूर किसी अंधेरे वाले खुले मैदान या छत पर जाएं और अपनी आंखों को अंधेरे में ढलने के लिए 20-30 मिनट का समय दें और सीधे आसमान की ओर लेटकर इसका आनंद लें।

अद्भुत नजारे को देखने सुरक्षा का रखें खास ध्यान
सूर्य ग्रहण को कभी भी सीधे न देखें। इसे देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर एक्लिप्स ग्लासेस यानि ISO 12312-2 सर्टिफाइड का ही इस्तेमाल करें। आम धूप के चश्मों का इस्तेमाल आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।

उल्का बौछार देखने के लिए आंखों की सुरक्षा के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है इसे नंगी आंखों से पूरी तरह सुरक्षित देखा जा सकता है।