सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में फैसला सुरक्षित, कहा- हर दिन 100 कुत्तों की नसबंदी करना…
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आवारा कुत्तों की नसबंदी और दूसरी जगह शिफ्ट करने के 7 नवंबर के आदेश में बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा। कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार हर दिन सिर्फ 100 आवारा कुत्तों की नसबंदी कर रही है जो नाकाफी है। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु ने कोर्ट के निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं किया है। राजस्थान की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि राज्य में नसबंदी केंद्र और शिक्षा संस्थानों के आसपास बाड़ लगाई गई है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि राज्य के पास केवल 45 वाहन हैं जो आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि जब तक पर्याप्त वाहन और स्टाफ नहीं होंगे, तब तक कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने, टीकाकरण और छोड़ने की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी? कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर समस्या को आज नहीं सुलझाया गया तो हर साल आवारा कुत्तों की संख्या 10-15 फीसदी बढ़ती जाएगी।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) ने बताया कि 7 नवंबर के आदेश के बाद NGOs और निजी संस्थाओं से 250 से ज्यादा आवेदन नसबंदी केंद्र और पशु आश्रय खोलने के लिए आए हैं, लेकिन कई अभी पेंडिंग हैं। कोर्ट ने AWBI से कहा कि सभी आवेदनों पर जल्दी फैसला किया जाए- या तो मंजूरी दें या ना दें, लेकिन फैसला टालें नहीं।
कोर्ट ने पहले भी कहा था कि अगर राज्यों ने आवारा कुत्तों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो डॉग बाइट मामलों में भारी मुआवजा देना पड़ सकता है। कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
बेंच ने NHAI के वकील से यह भी कहा कि एक मोबाइल ऐप बनाया जाए, जिससे लोग नेशनल हाईवे पर आवारा जानवरों की सूचना दे सकें। कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से कहा कि वह सड़क बनाने वाली कंपनियों से कह सकती है कि हाईवे पर आवारा जानवरों की देखभाल के लिए गौशाला (काऊशेड) बनाएं। यह काम उनकी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत किया जा सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि हर 50 किलोमीटर पर सड़क ठेकेदारों से गौशाला बनवाई जा सकती है, जहां आवारा जानवरों की देखभाल हो। NHAI के वकील ने इस पर विचार करने की बात कही।
