थरूर बोले- वंदे मातरम लोगों के लिए बोझिल, हर कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाना मुश्किल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी 6 छंदों को बजाने या गाना अनिवार्य करने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे गैर जरूरी और लोगों के लिए बोझिल बताया। केरल के तिरुवनंतपुरम में सोमवार को थरूर ने कहा, ‘वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है। जब इसे गाया जाता है, तो हम सम्मान में खड़े हो जाते हैं। इसका पहला छंद या पहले दो छंद ज्यादातर लोगों को जुबानी याद होते हैं। थरूर ने बताया कि पारंपरिक रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता था तो वहीं राष्ट्रगान अलग से कार्यक्रम के आखिर में बजाया जाता था।

नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि वहां शुरुआत और अंत में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। उनके मुताबिक, गीत लंबा होने के कारण लोगों के लिए दो बार खड़े रहना असुविधाजनक था। थरूर ने कहा

आखिरकार इस मामले पर कोई फैसला लेना पड़ सकता है, क्योंकि संसद द्वारा पारित ऐसा कोई कानून नहीं है जो इसे अनिवार्य बनाता हो। मुझे राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है।

वंदे मातरम का जो हिस्सा पारंपरिक रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है, उसकी लंबाई लगभग राष्ट्रगान जितनी ही है। उसे लंबे समय से स्वीकार और सम्मानित किया जाता रहा है।
इसका समाधान आपसी सहमति से निकल आएगा। वहीं केरल सरकार का कहना है कि इसका पूरा संस्करण गाना वैकल्पिक है, जबकि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का नजरिया कुछ अलग लगता है।

केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा।

नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।