ग्वालियर में ढाबे के कुक के खाते में 46 करोड़ का ट्रांजेक्शन, IT ने भेजा नोटिस
मध्य प्रदेश के भिंड शहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले एक कुक को करोड़ों रुपए के लेन-देन को लेकर आयकर विभाग का नोटिस मिला है, जिसमें बताया गया है कि उसके बैंक खाते से 46 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है। उधर युवक का कहना है कि वह एक ढाबे में खाना बनाने की नौकरी करता था, और उसके अकाउंट में पिछले पांच साल में तीन लाख रुपए का भी लेन-देन नहीं हुआ, ऐसे में करोड़ों रुपए का नोटिस मिलने के बाद उसकी रातों की नींद उड़ गई है। हालांकि जब उसने अपने पड़ोसी वकील की मदद से बैंक में जाकर पूछताछ की तो मामले की जड़ें दिल्ली में सालों पहले खुलवाए एक अन्य खाते तक पहुंचीं, जिसे वह सालों पहले बंद करवा चुका था। हालांकि उसकी जानकारी गलत निकली। यह नोटिस ग्वालियर में राजपूत ढाबा पर खाना बनाने वाले कुक रविंद्र चौहान को मिला है, जिसका परिवार भिंड के गांधी नगर में रहता है। मामले की जानकारी देते हुए रविंद्र ने बताया कि अप्रैल महीने में उसके घर एक सरकारी लेटर आया था, जो कि आयकर विभाग द्वारा भेजा गया था और अंग्रेजी में था, लेकिन क्योंकि रविंद्र उस समय पुणे में नौकरी कर रहा था और परिवार में कोई इतना पढ़ा-लिखा नहीं था कि उस नोटिस को समझ सके, तो घरवालों ने उस पर ध्यान नहीं दिया और बात आई-गई हो गई।
तीन महीने बाद यानी जुलाई में एकबार फिर वैसा ही नोटिस रविंद्र के नाम से आया तो घरवालों ने उसे इस बारे में जानकारी दी। कुछ दिन बाद जब रविंद्र घर पर आए और उन्होंने नोटिस को देखा तो वह भी उसे समझ नहीं पाए। इसके बाद रविंद्र उस नोटिस को लेकर पड़ोस में रहने वाले वकील प्रद्युम्न सिंह भदौरिया के पास पहुंचे और पूरी बात बताई। नोटिस देखकर उन्होंने रविंद्र को बताया कि उसके बैंक खाते से 46 करोड़ 18 लाख 32 हजार 916 रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है और शक के आधार पर आयकर विभाग ने इस बारे में जानकारी मांगी है। वकील की बात सुनते ही रविंद्र के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं क्योंकि वह एक ढाबे पर खाना बनाने का काम करने वाला साधारण व्यक्ति है और उसके बैंक खाते में इतना पैसा आने का सवाल ही नहीं था।
रविंद्र ने बताया, ‘जब यह नोटिस पहली बार आया था, तब मैं पुणे में हेल्पर की नौकरी कर रहा था। लेकिन जब दूसरी बार यह नोटिस आया तो मैं घबरा गया कि कुछ ना कुछ बात तो है, जो बार-बार यह लेटर आ रहे हैं, इसलिए नौकरी छोड़कर घर आ गया और अपने मोहल्ले में रहने वाले वकील प्रद्युम्न सिंह भदौरिया से मिला। तब उन्होंने बताया कि ये आयकर विभाग का नोटिस है और मेरे खाते में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है।’ वकील की सलाह पर भिंड के पंजाब नेशनल बैंक में मौजूद अपने खाते का पांच साल का स्टेटमेंट निकलवा लाए। खास बात तो यह है उन पांच वर्षों में उसके बैंक खाते में तीन लाख रुपए का भी ट्रांजेक्शन नहीं मिला। इसी बात से परेशान रविंद्र एकबार फिर वकील प्रद्युम्न सिंह के साथ बैंक गए और माजरा समझने की कोशिश की।
वहां बैंक मैनेजर ने उन्हें बताया कि रविंद्र के नाम पर दिल्ली की उत्तम नगर ब्रांच में एक और खाता भी है, जिसमें पिछले दो सालों से कोई लेनदेन नहीं हुआ है, लेकिन उसमें अब भी साढ़े 12 लाख रुपए जमा हैं। तब रविंद्र को याद आया कि 7 साल पहले जब वह ग्वालियर के मेहरा टोल प्लाजा पर हेल्पर का काम करता था, उसी दौरान सुपरवाइजर रहे शशिराय भूषण ने उसका एक खाता बैंक में खुलवाया था।
नोटिस को पढ़कर पता चला कि रविंद्र के खाते में 46 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ है। रविंद्र ने बताया कि उस नौकरी को छोड़ते समय मैंने सुपरवाइजर से उस खाते को बंद करने के लिए भी कहा था, और इसके लिए वह दिल्ली में सुपरवाइजर के साथ बैंक भी गया था, लेकिन तब वहां के बैंक मैनेजर ने कहा था कि, यह खाता बंद नहीं होगा और इसके लिए उसे जीएसटी ऑफिस जाना होगा। तब शशि भूषण ने उससे कहा कि वह यह काम करवा देगा और कुछ समय बाद उसने बताया कि वह खाता बंद हो गया है और रविंद्र ने उसकी बात मान ली थी।
रविंद्र का कहना है कि वह एक गरीब आदमी है और घर चलाने के लिए ढाबे पर काम करता है। अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी के लिए उसने पूर्व सुपरवाइजर शशिराय भूषण पर आरोप लगाया है। पीड़ित का यह भी कहना है कि, उसने इस संबंध में ग्वालियर के सिरोल थाना, एसपी जनसुनवाई और साइबर सेल में भी शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस मामले को लेकर रविंद्र की मदद को आगे आए ग्वालियर हाईकोर्ट के वकील प्रद्युमन सिंह भदौरिया का कहना है कि, जुलाई में दूसरा नोटिस आने के बाद रविंद्र उनके पास आए थे, नोटिस से पता चला कि उनके खाते में 46 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक के लेनदेन हुए हैं। इसके बाद वे उसे लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में गए, जहां उन्हें पता चला कि रविंद्र के नाम पर उत्तमनगर दिल्ली में खोला गया बैंक खाता किसी शौर्य ट्रेडर्स नाम की कंपनी से जुड़ा है और पूरा लेनदेन उसी कम्पनी के जरिए हुआ है।
