भारत में अनोखा पानी में तैरने वाला चर्च, हर 6 महीने में बदलता है रंग
कर्नाटक की हरी-भरी वादियों के बीच एक ऐसी रहस्यमयी जगह मौजूद है, जिसे देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है. यह है शेट्टीहल्ली रोजरी चर्च, जो हर मानसून में पानी के बीच अकेला खड़ा दिखाई देता है. चारों तरफ फैला गहरा पानी, टूटी हुई पुरानी दीवारें और सन्नाटे से भरा माहौल इस जगह को किसी हॉलीवुड हॉरर फिल्म जैसा बना देता है. यही वजह है कि लोग इसे फ्लोटिंग चर्च और कर्नाटक का हॉन्टेड चर्च तक कहने लगे हैं. हालांकि, इस चर्च की असली पहचान इसकी डरावनी कहानियों में नहीं, बल्कि इसके शानदार इतिहास और अनोखी खूबसूरती में छिपी है.इस चर्च का निर्माण 1860 के दशक में फ्रांसीसी मिशनरियों ने करवाया था. उस समय यह चर्च इलाके में रहने वाले ब्रिटिश एस्टेट मालिकों और स्थानीय ईसाई समुदाय के लिए प्रार्थना का मुख्य केंद्र हुआ करता था. फ्रेंच गोथिक शैली में बने इस चर्च की ऊंची मेहराबें, पत्थरों पर की गई नक्काशी और बड़ी-बड़ी खिड़कियां इसकी भव्यता को अलग पहचान देती थीं. हेमावती नदी के किनारे बना यह चर्च कभी लोगों की प्रार्थनाओं और धार्मिक गतिविधियों से गुलजार रहता था.
लेकिन 1960 के दशक में इसकी किस्मत पूरी तरह बदल गई. हेमावती बांध बनने के बाद आसपास का इलाका धीरे-धीरे जलाशय में बदलने लगा. पानी का स्तर बढ़ने से गांव खाली कराए गए और लोगों को दूसरी जगह बसना पड़ा. इसी के साथ यह चर्च भी वीरान हो गया. समय के साथ इसकी छत गिर गई, दीवारें टूटने लगीं, लेकिन इसके विशाल खंभे और मेहराब आज भी मजबूती से खड़े हैं.
मानसून के मौसम में यह चर्च आधा पानी में डूब जाता है. दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो कोई पुरानी इमारत झील के ऊपर तैर रही हो. वहीं सर्दियों में पानी कम होने पर लोग पैदल यहां तक पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि यह चर्च हर मौसम में अलग रूप दिखाता है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई भूतिया कहानियां भी सुनने को मिलती हैं. हालांकि, यहां किसी पैरानॉर्मल घटना का कोई पक्का सबूत नहीं मिला. असल में इसका सुनसान माहौल, पानी के बीच खड़ा पुराना ढांचा और धुंध से घिरा दृश्य लोगों को रहस्यमयी एहसास देता है.
