अनूठा स्काईवॉक, आसमान में लटका महसूस करेंगे खुद को, पैरों के नीचे नहीं दिखेगा कुछ!
लोग खुद को हवा में महसूस करने के लिए हवाई जहाज में नहीं जाते हैं. वे या तो पैरा ग्लाइडिंग का सहारा लेते हैं. या फिर ऊंचे पर्वत की छोटी पर खड़े होते हैं. पर ग्लास स्काईवॉक ऐसी संरचना है, जो आपको आसमान में चलने का अहसास करा देगी. अभी तक भारत में ऐसी संरचना नहीं थी, लेकिन अब अगले हफ्ते विशाखापट्टनम में इसकी हकीकत में बदलने की पूरी तैयारी हो चुकी है. यहां पहुंचने के बाद आपको पैरों के नीचे कुछ नहीं है यही अहसास होगा. उम्मीद की जा रही है कि इससे पर्यटन उद्योग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिलेगा.
ग्लास की स्काईवॉक दुनिया में हर जगह देखने को नहीं मिलती है. फिलहाल, दुनिया की सबसे ऊंची ग्लासवॉक चीन के झांगजियाजेइ में ग्लास ब्रिज के तौर पर है जो की जमीन के 300 मीटर ऊंचाई पर है और यह पुल 262 मीटर लंबा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि अब तक ऐसी कोई संरचना भारत में नहीं थी. भारत में अब तक वेगामन ग्लास ब्रिज ही सबसे लंबे कांच का पुल है जो कि 40 मीटर लंबा है. अब विशाखापट्टनम की कैलाशगिरी हिल्स पर यह नया कांच का स्काईवॉक 262 मीटर ऊंचा है और इसकी लंबाई 55 मीटर की है. और इस तरह ये भारत का सबसे ऊंचा और सबसे लंबा ग्लास स्काईवॉक हो जाएगा. अगले हफ्ते इसका लोकार्पण किया जा रहा है. ऊंचाई में एडवेंचर करने के शौकीन लोगों के लिए यह बहुत ही रोमांचकारी अनुभव लाएगा.
यह प्रोजेक्ट विशाखापट्टनम मैट्रोपॉलिटियन रीजिन डेवेलपमेंट अथॉरिटी (वीएमआरडीए) ने तैयार किया है और इसका मकसद तटीय पर्यटन को बढ़ावा देना है. इसे बनाने में 7 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसे बनाने के लिए जर्मनी से आयात किया गया खास कांच और मजबूत स्टील का इस्तेमाल किया गया है. भारत के मशूहर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक्स पर शेयर किया है. इसे कुछ ही घंटों में 84 हजार से ज्यादा व्यूज़ और 4 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं. लोगों ने इसउपलब्धि केलिए गर्व भी जाहिर किया है और साथ कुछ लोगों ने यह आशंका भी जताई है कि कुछ इस जगह का दुरुपयोग करने की कोशिश भी करेंगे. इस स्काईवॉक की खास बात ये है यह आधुनिक इंजीनियरिंग और कुदरती नजारों का शानदार संगम के रूप में नजर आएगा. यहां से चारों ओर का नजारा हैरान कर देगा. एक तरफ पहाड़ों की हरियाली तो दूसरी तरफ समुद्र और उसका किनारा, लोगों की आंखों के लिए बहुत ही सुकून भरा साबित होगा.
