भारत का अनोखा शहर, जहां रहना-खाना सब फ्री, नहीं देने पड़ते कोई पैसे

भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और खासियतों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. कहीं अलग संस्कृति देखने को मिलती है, तो कहीं लोगों के रहने का तरीका दूसरों से बिल्कुल जुदा होता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहां न कोई सरकार है, न धर्म के नाम पर भेदभाव और न ही रोजमर्रा की जिंदगी जीने के लिए पैसों की चिंता? सुनने में यह किसी सपने जैसा लग सकता है, लेकिन भारत में ऐसी एक जगह मौजूद है. ऑरोविले तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में स्थित है. यह पुडुचेरी के पास बसा एक अंतरराष्ट्रीय शहर है, जिसे ‘सिटी ऑफ डॉन’ यानी भोर का शहर भी कहा जाता है. इसकी स्थापना 1968 में मीरा अल्फासा ने की थी, जिन्हें लोग ‘द मदर’ के नाम से भी जानते हैं. इस शहर को बसाने के पीछे एक खास सोच थी. ऐसा स्थान तैयार करना, जहां दुनिया के अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग बिना किसी भेदभाव के मिल-जुलकर रह सकें.

ऑरोविले की सबसे दिलचस्प बात यहां का जीवन जीने का तरीका है. यहां रहने के इच्छुक लोगों को समुदाय के विकास में अपना योगदान देना होता है. यानी यहां सिर्फ सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए नहीं आया जा सकता, बल्कि शहर की बेहतरी के लिए काम करना भी जरूरी है. यहां सेवा, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी को काफी महत्व दिया जाता है. ऑरोविले को किसी एक देश या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाता. यहां अलग-अलग देशों के लोग साथ रहते हैं और एक-दूसरे की संस्कृति का सम्मान करते हैं. यही वजह है कि इसे यूनिवर्सल सिटी भी कहा जाता है.

ऑरोविले में आर्थिक व्यवस्था भी आम शहरों से थोड़ी अलग है. यहां रोजमर्रा के लेन-देन में पारंपरिक नकद भुगतान की जगह आंतरिक अकाउंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. निवासियों के लिए एक विशेष फाइनेंशियल सिस्टम मौजूद है, जिसके जरिए वे अपनी आर्थिक गतिविधियां करते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यहां हर चीज हर व्यक्ति को हमेशा मुफ्त मिलती है. रहने और सुविधाओं का लाभ व्यक्ति की स्थिति और समुदाय के नियमों पर निर्भर करता है.

ऑरोविले केवल रहने की अनोखी जगह नहीं है, बल्कि यहां जीवन की कई जरूरी सुविधाएं भी मौजूद हैं. यहां स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, यूनिवर्सिटी, ऑडिटोरियम, रेस्तरां, गेस्टहाउस, खेती और छोटे-बड़े उद्योग देखने को मिलते हैं. शहर की योजना इस तरह बनाई गई है कि लोग प्रकृति के करीब रहते हुए सामुदायिक जीवन का हिस्सा बन सकें. यहां का मातृमंदिर भी खास आकर्षण है. यह कोई पारंपरिक पूजा स्थल नहीं, बल्कि ध्यान और आंतरिक शांति के लिए बनाया गया स्थान है.

अगर आप इस अनोखे शहर को करीब से देखना चाहते हैं, तो यहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं. ऑरोविले का अपना एयरपोर्ट नहीं है. चेन्नई एयरपोर्ट यहां का प्रमुख नजदीकी हवाई अड्डा है. वहां से टैक्सी या कैब लेकर ऑरोविले पहुंचा जा सकता है. यहां का नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन विल्लुपुरम है, जो लगभग 32 किलोमीटर दूर है. स्टेशन से टैक्सी लेकर शहर पहुंच सकते हैं. ऑरोविले सड़क नेटवर्क से पुडुचेरी, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां बस या निजी वाहन से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है.