अनोखा तालाब, जहां रहते हैं 100 से ज्यादा मगरमच्छ, फिर भी बेखौफ होकर नहाते हैं लोग!
दुनियाभर में ऐसी कई अद्भुत और रहस्यमयी जगहें हैं, जो इंसानों और जानवरों के बीच के अनोखे रिश्ते को बयां करती हैं. इनमें से कुछ जगहें हर किसी को हैरान कर देती हैं. ऐसी ही एक जगह अफ्रीकी देश बुरकीना फासो की राजधानी औगाडौगू से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाजोले गांव है, जो एक विशाल झील के किनारे बसा हुआ है. यहां की परंपरा पूरी दुनिया में बिल्कुल अनूठी है. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इस गांव में पिछले कई पीढ़ियों से स्थानीय निवासी सौ से अधिक खतरनाक मगरमच्छों के साथ पूरी तरह से मेल-मिलाप और सद्भाव के साथ रह रहे हैं. ये लोग मगरमच्छों से भरे तालाब में बेखौफ होकर नहाते हैं, घरेलू काम करते हैं, लेकिन मगरमच्छ इन्हें चोट नहीं पहुंचाते और ना ही शिकार करने की कोशिश करते हैं. बाजोले के ये मगरमच्छ बड़े और अधिक आक्रामक माने जाने वाले नील नदी के मगरमच्छों की फैमिली से हैं. ये अपनी एक अलग प्रजाति से ताल्लुक रखते हैं, जिसे क्रोकोडिलस सूचस कहा जाता है.
इन्हें पश्चिमी अफ्रीकी मगरमच्छ या मरुस्थलीय मगरमच्छ के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि ये मुख्य रूप से जंगली क्षेत्रों और खुले आवासों में पाए जाते हैं. इन मगरमच्छों या यूं कहें कि उनके पूर्वजों ने उत्तरी अफ्रीका के बदलते पर्यावरण के साथ खुद को पूरी तरह ढाल लिया है. आज से लगभग 10,000 साल पहले जहां हरी-भरी सवाना और घास के मैदान हुआ करते थे, वे आज गर्म और शुष्क सहारा रेगिस्तान में बदल चुके हैं, लेकिन इन जीवों ने हर स्थिति में खुद को जीवित रखा है. नील नदी के मगरमच्छ जहां रहने के लिए बड़ी मौसमी नदियों को पसंद करते हैं, तो पश्चिमी अफ्रीका के मगरमच्छ मुख्य रूप से जंगलों के भीतर स्थित लैगून और आर्द्रभूमि को अधिक पसंद करते हैं. इनमें से कुछ आर्द्रभूमि (जिन्हें गुएल्टा कहा जाता है) केवल बारिश के मौसम में या तब बनती हैं, जब भूमिगत झरने किसी गड्ढे में इकट्ठा हो जाते हैं. जब पानी सूखने लगता है या वाष्पित हो जाता है, तो ये मगरमच्छ एक प्रकार की सुस्ती या ग्रीष्मनिद्रा में चले जाते हैं. इस दौरान वे कुछ नहीं खाते हैं और अपनी गतिविधियों को बिल्कुल न्यूनतम स्तर पर ले आते हैं, ताकि उनका जीवन सुरक्षित रह सके.
पश्चिमी अफ्रीकी मगरमच्छ नील नदी के मगरमच्छों की तुलना में काफी कम आक्रामक होते हैं और आम तौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते हैं. बाजोले की तरह ही पूरे पश्चिमी अफ्रीका में कई ऐसे समुदाय हैं, जो इन मगरमच्छों के बेहद करीब रहते हैं. यहां तक कि उनसे डरने के बजाय उनका आदर करते हैं तथा उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाते हैं. बाजले के लोगों का अटूट विश्वास है कि ये मगरमच्छ बारिश के साथ आसमान से उतरे थे और यदि ये मगरमच्छ यहां से गायब हो गए, तो तालाब का पानी भी हमेशा के लिए सूख जाएगा. पवित्र मगरमच्छों की ऐसी ही अद्भुत बस्तियां मध्य-पश्चिमी बुरकीना फासो के साबो शहर में भी देखने को मिलती हैं. इसके अलावा बुरकीना फासो की सीमा से सरे घाना देश में पगा नाम का एक ऐसा शहर भी है, जहां मगरमच्छों का अपना एक समूह इंसानों के ठीक बगल में शांति से निवास करता है. बाजोले और पगा दोनों ही जगहों पर विशेष गाइड मौजूद होते हैं, जो मुर्गे को चारे के रूप में इस्तेमाल करके इन मगरमच्छों को पानी से बाहर आकर्षित करते हैं, ताकि दूर से आने वाले पर्यटक उन्हें सहला सकें और उनके साथ अपनी यादगार तस्वीरें खिंचवा सकें.
