कहां है दुनिया का सबसे पुराना पुल? बहुत कम लोगों को होगा पता, 4000 साल पहले का है इतिहास

दुनिया की सबसे पहली सड़क और इमारत का जिक्र जब भी होता है, तो हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर इंसानों द्वारा बनाया गया सबसे पहला पुल कहां होगा? इस सवाल का जवाब छुपा है मध्य पूर्व के देश इराक के रेगिस्तानी इलाके में. आधुनिक इराक के बगदाद और बसरा शहर के ठीक बीचो-बीच गिरसू (Girsu) नाम का एक प्राचीन शहर बसा हुआ है. लगभग 5,000 साल पुराना यह शहर सुमेरियन सभ्यता की राजधानी हुआ करता था. इसी पौराणिक शहर की पुरातात्विक खुदाई में पकी हुई लाल ईंटों से बना एक ऐसा ढांचा मिला है, जिसे आधुनिक विज्ञान और इतिहासकार दुनिया का सबसे पुराना पुल मानते हैं. इसका इतिहास करीब 4,000 साल पुराना है. इंसानी इंजीनियरिंग की इस अद्भुत मिसाल की कहानी जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही दर्दनाक भी रही है. इस ऐतिहासिक शहर की पहली खुदाई साल 1877 में फ्रांसीसी पुरातत्वविदों की एक टीम ने शुरू की थी.

उस दौर में संरक्षण और खुदाई की आधुनिक तकनीकें न होने के कारण इस पुरातात्विक स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया गया. सही देखरेख न होने की वजह से इस प्राचीन शहर पर चोरों और खजाना ढूंढने वाले डकैतों का कब्जा हो गया. अनुमान लगाया जाता है कि गिरसू शहर की मिट्टी तले दबी 35,000 से 40,000 दुर्लभ क्यूनीफॉर्म मिट्टी की पट्टिकाएं और अनमोल कलाकृतियां रातों-रात लूट ली गईं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच दिया गया, जबकि फ्रांसीसी टीम केवल 4,000 पट्टिकाएं ही बचा सकी थी. इस 4,000 साल पुराने पुल की पहली आधिकारिक पहचान साल 1920 के दशक में हुई थी. लेकिन उस समय वैज्ञानिक इसकी असलियत को नहीं समझ पाए. शुरुआती दौर में इसे कभी कोई प्राचीन मंदिर, कभी पानी रोकने वाला बांध तो कभी वाटर रेगुलेटर समझ लिया गया. लंबे रिसर्च के बाद हाल ही में यह साबित हुआ कि यह संरचना वास्तव में एक प्राचीन नहर या जलमार्ग के ऊपर बनाया गया पुल ही था.

अफसोस की बात यह रही कि 1920 में खोजे जाने के बावजूद इस अनमोल पुल को करीब 100 सालों तक खुले आसमान के नीचे बेदरो-बदली हालत में छोड़ दिया गया. आज आधुनिक दौर में इस प्राचीन गिरसू शहर को अरबी भाषा में तिल्लो कहा जाता है. लंबे अरसे से लावारिस पड़े इस 4,000 साल पुराने पुल को बचाने के लिए कुछ साल पहले बड़ी वैश्विक पहल शुरू हुई. ब्रिटिश म्यूजियम, यूके सरकार की आर्थिक मदद से इस ऐतिहासिक जगह को बचाने का काम कर रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत इराकी पुरातत्वविदों को सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और ऐतिहासिक इमारतों को नया जीवन देने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है. ब्रिटिश म्यूजियम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के इस सबसे पुराने पुल का पुनरुद्धार करना इस अभियान की पहली प्राथमिकता है, ताकि इंसानी सभ्यता के इस 4,000 साल पुराने अजूबे को हमेशा के लिए कायम रखा जा सके.