उत्तराखंडः यूनिफॉर्म सिविल कोड संशोधन लागू, जबरन शादी, लिव-इन पर 7 साल तक कैद

उत्तराखंड सरकार को धर्मांतरण विरोधी कानून के मुकदमों में अदालत में झटके पर झटके मिले हैं, वहीं उसने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) संशोधन अध्यादेश 2026 लागू कर दिया है। उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है, जिसमें जबरदस्ती, धोखाधड़ी या बल प्रयोग से रिश्ता बनाने पर अधिकतम 7 साल की कैद हो सकती है।

एक साल पहले लागू हुई यूसीसी की समीक्षा के बाद ये बदलाव किए गए हैं। नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के मुताबिक दंडात्मक प्रावधानों को मजबूत किया गया है, क्योंकि मूल यूसीसी में सिविल कानून होने के कारण दंड सीमित थे।

उत्तराखंड की बीजेपी सरकार अपने एजेंडे के तहत दो कानून धर्मांतरण विरोधी और यूसीसी लेकर आई थी। इसके प्रावधानों और समुदाय विशेष को टारगेट करने की वजह से विपक्ष ने इसकी तीखी निन्दा की थी। हाल ही में धर्मांतरण विरोधी कानून के मुकदमे जब कोर्ट में पहुंचे तो वहां कई केसों में सरकार को झटके लगे। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। सात साल पहले धर्मांतरण विरोधी कानून लाया गया था। लगभग सात साल बाद, अदालती रिकॉर्ड बताते हैं कि यह कानून बुनियादी कानूनी कसौटी यानी सबूतों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। गिरफ्तारियां जारी रहने के बावजूद, न्यायिक जांच ने अक्सर राज्य के दावे को कमजोर कर दिया है, और पूर्ण सुनवाई तक पहुंचे सभी पांच मामलों में दोषियों को बरी कर दिया गया है। उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (यूएफआरए) के तहत दर्ज मामलों की जांच की है। उसने काफी सूचनाएं आरटीआई के ज़रिए भी जुटाईं।

जबरन या धोखे से विवाह/लिव-इन: किसी व्यक्ति पर बल, दबाव, धोखाधड़ी या फर्जी तरीके से विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश कराने वाले को 7 साल तक की जेल हो सकती है।
एक साथ कई लिव-इन: यदि कोई व्यक्ति पहले से लिव-इन में रहते हुए किसी अन्य के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो भी 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
नाबालिग के साथ लिव-इन: वयस्क व्यक्ति द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर 6 महीने तक की साधारण कैद और 50 हजार रुपये तक जुर्माना, या दोनों। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 1 महीने की कैद।

बिना तलाक के दूसरा विवाह/लिव-इन: विवाहित व्यक्ति द्वारा कानूनी तलाक लिए बिना दूसरा विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप बनाने पर 7 साल तक की जेल।
तलाक से जुड़े नियम: गैर-कानूनी तरीके से तलाक प्राप्त करने पर 3 साल तक की कैद और जुर्माना। विवाह के समय पहचान छिपाने या गलत जानकारी देने को अब विवाह रद्द करने का आधार बनाया गया है।
अन्य सजा: किसी को जबरन या उकसाकर प्रतिबंधित शर्तों का पालन कराने पर 3 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक जुर्माना, डिफॉल्ट में अतिरिक्त 6 महीने की जेल।

प्रशासनिक बदलावों में सब-रजिस्ट्रार की जगह पर अपर सचिव को सक्षम अधिकारी बनाया गया है। रजिस्ट्रार जनरल को विवाह, तलाक, लिव-इन और उत्तराधिकार से जुड़े रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार दिया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर रजिस्ट्रार द्वारा टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने का प्रावधान है। शेड्यूल-2 में ‘स्पाउस’ शब्द को ‘विधवा’ से बदला गया है।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, “मुख्य उद्देश्य प्रावधानों को स्पष्ट, प्रभावी और व्यावहारिक बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कार्यान्वयन के दौरान कई मुद्दे सामने आए थे, जिनके आधार पर बदलाव किए गए हैं।”

ये संशोधन उत्तराखंड को समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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