केरल सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ‘वंदे मातरम’ सेमिनार के दौरान हंगामा… छात्रों ने चप्पल दिखाकर किया विरोध-प्रदर्शन

पुलिस ने गुरुवार को बताया कि ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान विरोध-प्रदर्शन करने वाले केरल सेंट्रल यूनिवर्सिटी के 25 अज्ञात छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह सेमिनार 6 और 7 अक्टूबर को कासरगोड में यूनिवर्सिटी के पेरिया कैंपस में आयोजित किया गया था। छात्र संगठनों ने मुख्य वक्ता के तौर पर RSS से जुड़े संगठन ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार की भागीदारी का विरोध किया था। 6 अक्टूबर को लाइब्रेरी सेमिनार हॉल के बाहर छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। खबरों के मुताबिक, कम से कम चार छात्र घायल हुए और छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों (जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं) के साथ बदसलूकी की गई।

इस विरोध प्रदर्शन में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI), केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) जैसे छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया। इन समूहों ने नंदाकुमार की मौजूदगी और यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में RSS से जुड़े संगठनों की भागीदारी पर आपत्ति जताई। उन्होंने “RSS वापस जाओ” जैसे नारे लगाए और आरोप लगाया कि इस सेमिनार का इस्तेमाल कैंपस में एक खास विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। यह सेमिनार साहित्य अकादमी ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ केरल के साथ मिलकर आयोजित किया था। यह कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर देश भर में हो रहे कार्यक्रमों का हिस्सा था। नंदाकुमार को उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देना था।

 

विरोध कर रहे छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि सेमिनार के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले कुछ छात्रों को कार्यक्रम स्थल में घुसने नहीं दिया गया। यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी, जिन्होंने खुद को ‘डीन ऑफ़ स्टूडेंट अफेयर्स’ बताया, ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि रजिस्टर्ड छात्रों को अंदर क्यों नहीं आने दिया गया और उन्होंने कहा कि उन्हें आयोजकों से इस बारे में पूछना होगा।

कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जब विरोध कर रहे छात्र सेमिनार हॉल में घुसने की कोशिश कर रहे थे, तो छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। रिपोर्ट के अनुसार, SFI यूनिट सेक्रेटरी सैयद अली समेत चार छात्रों को चोटें आईं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की गई। सेमिनार से पहले यूनिवर्सिटी ने एक सर्कुलर जारी कर चेतावनी दी थी कि जो कोई भी जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सर्कुलर में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ (Prevention of Insults to National Honour Act) के प्रावधानों का हवाला दिया गया और कहा गया कि उल्लंघन करने पर जेल की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

हालांकि, छात्र समूहों का कहना था कि उनका विरोध वंदे मातरम के खिलाफ नहीं, बल्कि सेमिनार में नंदकुमार की भागीदारी और सेमिनार के आयोजन के तरीके के खिलाफ था। विरोध प्रदर्शन की खबरों में बताया गया कि छात्र लगातार RSS के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

केरल और तमिलनाडु के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर 7 अक्टूबर को सेमिनार के समापन सत्र में शामिल हुए। अपने भाषण में, अर्लेकर ने ‘वंदे मातरम’ के इतिहास के बारे में विस्तार से अध्ययन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसमें उन हालात को भी शामिल किया जाना चाहिए जिनमें बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे लिखा था और राष्ट्रीय आंदोलन में इसकी भूमिका क्या थी, इस पर भी गौर किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले दिन यूनिवर्सिटी में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी ज़िक्र किया और कहा कि ‘वंदे मातरम’ का विरोध करने वाली “ताकतों और विचारों” की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने इस घटना को ऐसी घटना बताया जिसे अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए और ऐसी प्रवृत्तियों के खिलाफ सामाजिक हस्तक्षेप की बात कही।

हालांकि, छात्रों का कहना था कि उनका विरोध सेमिनार में RSS से जुड़े वक्ताओं की मौजूदगी के खिलाफ था, न कि राष्ट्रगीत के खिलाफ। गवर्नर के भाषण के दौरान यह अंतर विवाद का विषय बन गया। FIR के मुताबिक, बेकल पुलिस ने 25 ऐसे छात्रों के खिलाफ़ खुद से मामला दर्ज किया है जिनकी अभी पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस का आरोप है कि 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे ये छात्र गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा हुए, नारे लगाए और वहां से हटने के लिए कहे जाने के बावजूद सेमिनार में बाधा डाली। छात्रों पर ‘भारतीय न्याय संहिता’ की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जो गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, सरकारी अधिकारी के आदेश न मानने और दंगा करने से जुड़ी हैं। पुलिस जांच के हिस्से के तौर पर कैंपस के CCTV फुटेज की जांच कर रही है।

यह मामला सेमिनार को लेकर दो दिनों तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद सामने आया है। इस विरोध में वे छात्र संगठन शामिल थे जो नंदकुमार के शामिल होने और साहित्य अकादमी व अखिल भारतीय साहित्य परिषद के साथ मिलकर यूनिवर्सिटी द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित करने के फैसले का विरोध कर रहे थे। सेमिनार 6 और 7 अक्टूबर को आयोजित हुआ, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा हुई। नंदकुमार ने मुख्य भाषण दिया, जबकि अर्लेकर समापन सत्र में शामिल हुए।