देश का वो गांव, जहां बच्चा-बच्चा बोलता है स्पेनिश, लगन ने जीता सबका दिल!

देश में एक गांव ऐसा भी है जहां का बच्चा-बच्चा स्पेनिश बोलता है. यह गांव बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ तहसील के मौजा टिकरावा में आता है. नाम है ‘पूरे बर्मन’. इस गांव के स्कूल के बच्चे स्पेनिश बोलते हैं. यह चमत्कार रातोंरात तो नहीं हुआ. इसके पीछे रिजवान नाम के एक टीचर की मेहनत है. रिजवान ही यहां के बच्चों को स्पेनिश सिखाते हैं. अब इस छोटे से गांव में इस विदेशी भाषा को सीखने की होड़ लगी हुई है. टीचर रिजवान ने स्पेनिश भाषा बच्चों को क्यों सिखाई, इसके पीछे की वजह और भी दिलचस्प है.

स्पेनिश सिखाने का ख्याल मन में कैसे आया, इस बारे में रिजवान बताते हैं, ‘पैशन को करियर बनाना थोड़ा मुश्किल होता है. मैंने भाई के साथ मिलकर ‘अवर लैंग्वेज स्कूल’ नाम से यूट्यूब चैनल खोला. हिंदी भाषा विदेशियों को सिखाने के मकसद ये यूट्यूब चैनल शुरू किया. इंग्लिश के जरिये हिंदी सिखाते थे. मेरी एक वीडियो स्पेन और बोलीविया पहुंची. पेरू, मैक्सिको पहुंची. स्पेनिश 22 देशों में बोली जाती है. वहां से कमेंट आए कि हमें अंग्रेजी नहीं आती, हमें स्पेनिश के जरिये हिंदी सिखाइये.’

रिजवान बताते हैं कि उन्हें पहले वीडियो से 100 डॉलर मिले थे. पैसे से प्रेरणा मिलती है. ऐसे में उन्होंने स्पेनिश भाषा सीखी ताकि वो विदेशियों को आसानी से हिंदी सिखा सकें. फिर खुद से स्पेनिश सीखी. इंटरनेट पर वीडियो देखे. कुछ किताबें मंगवाई. 20-25 स्पेनिश दोस्त बनाएं. उनके साथ बात की. लखनऊ आने का आमंत्रण दिया. हिंदी भाषा फ्री में सिखाने की बात कही. इस तरह से विदेश के लोग हिंदी सीखने लगे. इसी बीच कोविड आ गया. फिर दिल्ली जाकर डेल की परीक्षा दी. दो लेवल क्वालिफाइ किए.

दो परीक्षा क्वालिफाइ करने के बाद टूरिज्म का लाइसेंस लिया. टूरिस्ट गाइड का वीजा ले लिया. रिजवान ने बताया कि उन्होंने गांव के बच्चों को स्पेनिश सिखाना शुरू किया. सुबह स्कूल जाने से पहले और शाम को स्कूल से लौटने के बाद बच्चे उनके घर पर आते हैं, स्पेनिश सीखते हैं. अब गांव का बच्चा-बच्चा स्पेनिश बोलता है. अपना और अपने परिवार का परिचय देता है. स्पेनिश सीखने की ललक में बच्चे देर रात तक रिजवान के घर पर बैठे रहते हैं.

गांव के बच्चे ही दूसरे बच्चों को स्पेनिश सिखाते हैं. वो भी खेल-खेल में. गांव की दीवारें भले ही मिट्टी है लेकिन इनमें स्पेनिश भाषा के शब्द ‘हैलो’ और ‘वेलकम’ लिखे हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनके बच्चे दूसरे देश की भाषा सीख रहे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि गांव में अक्सर स्पेन के लोग आते-जाते रहते हैं. गांव के बच्चे उन्हें अपना घर दिखाते हैं. गांव के आसपास की जगह घुमाते हैं. वो यहां हिंदी सीखने आते हैं.

रिजवान के छोटे भाई भी टीचर हैं. वो स्पेनिश सिखाते हैं. वो बताते हैं कि इन बच्चों को स्पेनिश सिखाना कितना कठिन था. वो बताते हैं, ‘इन बच्चों को स्पेनिश सिखाने में कई तरह के चैलेंज आते हैं. गांव के बच्चों का माइंडसेट बिल्कुल अलग होता है. गांव के बच्चों को अवधी से पहले लखनऊ की बोली, फिर उन्हें स्पेनिश सिखाना पड़ती है. तब वो सीखते हैं.’