इस गांव में 6 पीढ़ियों से एक ही चूल्हे में बनता है 83 सदस्यों का खाना, प्यार से रहता है पूरा परिवार

आज के दौर में जहां संयुक्त परिवार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं और ज्यादातर लोग छोटे परिवारों में रहना पसंद कर रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश का एक परिवार अपनी अनोखी जीवनशैली के कारण चर्चा में है. अनंतपुर जिले के कुरलपल्ली गांव में रहने वाला नागप्पा परिवार इस बात का उदाहरण है कि आपसी समझ, सहयोग और विश्वास के दम पर बड़ा परिवार भी खुशी-खुशी एक साथ रह सकता है.

इस परिवार में कुल 83 सदस्य हैं, जो छह पीढ़ियों से एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं. हालांकि सभी लोग चार अलग-अलग मकानों में रहते हैं, लेकिन उनका रहन-सहन और पारिवारिक व्यवस्था आज भी एक संयुक्त परिवार की तरह ही है. घर के बड़े-बुजुर्ग पूरे परिवार का मार्गदर्शन करते हैं और हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाता है. परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, बहुएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी मिलकर घर और कारोबार की जिम्मेदारियां संभालते हैं.

इस परिवार की सबसे खास बात इसकी रोजाना की दिनचर्या है. हर सुबह सभी बड़े सदस्य एक साथ बैठकर चाय या कॉफी के साथ पूरे दिन की योजना बनाते हैं. इसी दौरान तय किया जाता है कि कौन खेती का काम देखेगा, कौन घर की जिम्मेदारी संभालेगा और दिनभर के जरूरी काम कैसे पूरे किए जाएंगे. इस व्यवस्थित तरीके से काम बांटने की वजह से किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता और सभी मिलकर जिम्मेदारियां निभाते हैं.

आधुनिक समय में जहां हर घर की अलग रसोई होती है, वहीं इस परिवार में चार मकानों के बावजूद पूरे परिवार का भोजन एक ही रसोई में तैयार किया जाता है. राशन से लेकर सब्जियों की व्यवस्था सामूहिक रूप से होती है, जबकि परिवार की महिलाएं मिलकर सभी सदस्यों के लिए खाना बनाती हैं. साथ बैठकर भोजन करना यहां की सालों पुरानी परंपरा है, जिसे परिवार आज भी पूरी श्रद्धा से निभा रहा है
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परिवार की आय का स्रोत केवल खेती नहीं है. कृषि के साथ-साथ यह परिवार परिवहन का व्यवसाय भी करता है. परिवार के पास कई बसें हैं, जो आसपास के क्षेत्रों में संचालित होती हैं. सबसे खास बात यह है कि परिवार की पूरी कमाई एक शेयर व्यवस्था में रखी जाती है और जरूरत के अनुसार खर्च की जाती है. यहां व्यक्तिगत कमाई से ज्यादा सामूहिक भलाई को महत्व दिया जाता है.

इतने बड़े परिवार में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन परिवार का एक नियम है कि किसी भी विवाद को अगले दिन तक नहीं ले जाया जाएगा. अगर किसी बात पर असहमति होती है, तो उसी दिन बातचीत के जरिए उसका समाधान निकाल लिया जाता है. परिवार के बुजुर्ग मानते हैं कि सम्मान, धैर्य और खुला संवाद ही रिश्तों को मजबूत बनाए रखता है. इस परिवार की कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है. कई यूजर्स इसे आधुनिक दौर में संयुक्त परिवार की मिसाल बता रहे हैं.