दुनिया का वो गांव, जहां नहीं है एक भी सड़क, घर की छत पर ही चलते हैं लोग
दुनिया में कई अनोखे गांव हैं, लेकिन ईरान का मसुलेह गांव शायद सबसे अलग और आकर्षक है. इस गांव की खासियत ये है कि यहां एक भी सड़क नहीं है. ना यहां कार चलती है और ना ही बाइक दिखाई देती है. लोग घरों की छतों पर चलकर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं. यही छतें उनके लिए सड़क, बाजार और सामाजिक केंद्र का काम करती हैं. मसुलेह गांव ईरान के उत्तर में शोमाल क्षेत्र के गिलान प्रांत में स्थित है. यह गांव पहाड़ी ढलान पर बना हुआ है. घर एक-दूसरे के ऊपर इस तरह बने हैं कि नीचे वाले घर की छत, ऊपर वाले घर के लिए आंगन या रास्ता बन जाती है. इस अनोखी वास्तुकला की वजह से गांव को “छतों का गांव” भी कहा जाता है. पर्यटकों के लिए यह जगह स्वर्ग जैसी है. घने जंगल, ऊंचे पहाड़, कोहरा और पुरानी इमारतें मिलकर यहां का माहौल जादुई बना देते हैं. लोग यहां की छतों पर घूमते हैं, लोकल हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर सामान खरीदते हैं और पारंपरिक ईरानी चाय का मजा लेते हैं. दुकानें, कैफे और छोटे-छोटे रेस्टोरेंट भी छतों पर ही चलते हैं.
मसुलेह की स्थापना सदियों पुरानी मानी जाती है. यहां के लोग सदियों से इसी ढंग से रह रहे हैं. घर पत्थर और मिट्टी से बने हैं जो ठंड और बारिश दोनों से सुरक्षा देते हैं. गांव पूरी तरह पैदल यातायात पर आधारित है. कोई वाहन नहीं घुस पाता क्योंकि यहां रास्ते ही नहीं हैं. पर्यटक बताते हैं कि यहां घूमना बिल्कुल फेयरीटेल जैसा लगता है. सुबह कोहरा छा जाता है तो ऐसा लगता है जैसे बादलों में चल रहे हों. शाम को सूरज ढलते समय पूरे गांव पर सुनहरा रंग छा जाता है. फोटोग्राफर्स के लिए यह जगह स्वर्ग है. ईरान सरकार ने मसुलेह को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है. यहां पर्यटन बढ़ाने के लिए सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं. फिर भी गांव अपनी मूल संरचना को बरकरार रखे हुए है. स्थानीय लोग पर्यटकों का स्वागत करते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति से रूबरू कराते हैं.
मसुलेह की सबसे खास बात यह है कि यहां का जीवन पूरी तरह प्रकृति के साथ सामंजस्य में है. यहां ना तो बड़े निर्माण हो रहे हैं और ना ही आधुनिक सड़कों का जाल बिछाया गया है. लोग अभी भी पारंपरिक तरीके से रहते हैं. महिलाएं लोकल क्राफ्ट बनाती हैं, पुरुष कृषि और पर्यटन से जुड़े काम करते हैं. दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग खासतौर पर मसुलेह घूमने आते हैं. कुछ इसे “छतों का गांव” तो कुछ “बादलों का गांव” कहते हैं. सोशल मीडिया पर इसके वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद पर्यटकों की संख्या और बढ़ गई है. भारतीय पर्यटकों के लिए भी मसुलेह एक अनोखा अनुभव है. यहां की शांति, प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी वास्तुकला देखकर कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है. कई लोग कहते हैं कि आधुनिक दुनिया में इतनी शांति और अनोखापन बहुत कम जगहों पर बचा है.
