महादेवघाट श्मशान में घुटनों तक भरा पानी : शव दहन हुआ मुश्किल, कचना, मोवा में भी यही हाल
रायपुर। शहर में पिछले चार दिनों से हो रही झमाझम बारिश से जहां शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई है, वहीं राजधानी सहित आउटर के वार्डों में स्थित मुक्तिधाम भी इससे अछूता नहीं रहे। महादेवघाट स्थित श्मशानघाट, मोवा श्मशानघाट, सोनडोंगरी और कचना के मुक्तिधाम में जलभराव होने से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोग काफी परेशान हुए।
महादेवघाट के श्मशान घाट के दो अलग-अलग एंट्री पाइंट पर पानी भरने से वहां जाने वालों को घुटना भर पानी में चलकर अंतिम संस्कार स्थल पहुंचना पड़ा। स्थल पर भारी गंदगी तैरती हुई नजर आई। अंतिम संस्कार के लिए बनाए गए शेड के सामने पानी भरने की वजह से अस्थि संचय का काम प्रभावित रहा। मुक्तिधाम वालों ने संबंधित परिजनों को अंतिम संस्कार के दूसरे ही दिन उनके दिए मोबाइल नंबर पर कॉल कर महादेवघाट बुलवाकर अस्थि चुनकर वहां बनाए गए लॉकर में सुरक्षित रखवाया।
दरअसल, शहर में तेज बारिश के चलते श्मसानघाट में पानी भर गया है, निकास नाली की समुचित व्यवस्था नहीं होने और शहर के आउटर में स्थित वार्डो के श्मशानघाट के आसपास अतिक्रमण होने से जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित हुई है। दिवंगत के अंतिम संस्कार के लिए जलभराव के बीच कठिन परिस्थितियों से उनके परिजनों को गुजरना पड़ रहा है। बारिश के कारण उत्पन्न इस स्थिति ने श्मशानघाट जैसे संवेदनशील जगह पर बाधा खड़ी कर दी है।
जानकारों का कहना है जोन 8 क्षेत्र स्थित रायपुरा के महादेवघाट स्थित श्मशन घाट में पिछले 7 साल से जलभराव की स्थिति देखी जा रही है। इस बीच नगर निगम में महापौर और आयुक्त बदल गए फिर भी जलभराव की समस्या दूर नहीं हो पाई।
नगर निगम जोन 8 के पंडित जवाहर लाल नेहरू वार्ड स्थित सोनडोंगरी के श्मशानघाट में जल निकासी के लिए नालियां नहीं बनने से जलभराव की समस्या उत्पन्न हुई है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए कच्चे और उबड़खाबड़ वाले रास्ते से होकर आना जाना पड़ता है। अंतिम संस्कार में पहुंचने वालों के बैठने के लिए न बैठने की व्यवस्था है न ही बारिश व गर्मी से बचने का इंतजाम। बारिश में भीगते हुए लोगों को अंतिम संस्कार क्रिया पूरी होने का इंतजार करना पड़ता है। वार्ड पार्षद भगतराम हरवंश ने जोन के माध्यम से श्मसानघाट सौंदर्याकरण के लिए प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए भिजवाया है, जिसकी अभी स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
खारून नदी से लगे महादेवघाट के श्मशान घाट में चिंगरी नाला के तरफ से ओवरफ्लो होकर गंदा पानी तेजी के साथ घुसने से श्मशानघाट के दोनों तरफ के एंट्री पाइंट में लबालब पानी भर गया है। घुटना भर से उपर पानी से होकर लोगों को श्मसानघाट के शेड तक पहुंचने की नौबत आई है। यहीं नहीं पहले जहां अंतिम संस्कार के बाद अस्थि चुनने के लिए तीन दिन का अंतराल रहता, उसकी जगह अब दाह संस्कार के दूसरे ही दिन संबंधितपरिजनों को उनके मोबाइल पर कॉल कर अस्थि संकलन करने बुलाया जा रहा है, ताकि इन अस्थियों को वहां बनाए गए लॉकर में सुरक्षित रखा जा सके। बुधवार को महादेवघाट के श्मशान घाट में 6 मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। डगनिया, सुंदरनगर, चंगोराभाठा, भाठागांव से आए दिवंगत के परिजनों को गुरुवार की सुबह अस्थि संकलन के लिए बुलाया गया।
महादेवघाट में शव वाहन की व्यवस्था संभाल रहे युवा पहल के संस्थापक राहुल शर्मा ने बताया कि तेज बारिश की वजह से श्मसानघाट परिसर में बने युवा पहल के कक्ष में पूरी रात शव रखने के फ्रीजर को उपर उठाकर सुरक्षित रखने की मशक्कत करनी पड़ी। चूंकि इससे पहले भी मुक्तिधाम में दो बार जलभराव की वजह से वहां रखे फ्रीजर डूबने की नौबत आई, वाटर कूलर भी इससे खराब हो गए थे। श्री शर्मा ने श्मशान घाट में जलभराव की समस्या से महापौर मीनल चौबे और निगम आयुक्त को अवगत करा दिया है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर वार्ड स्थित मोवा के लिए दलदलसिवनी के इंदिरा स्मृति वन के पास श्मशानघाट बना है, जहां लगाया गया शेड पूरी तरह जर्जर हो चुका है। नाले का गंदा पानी श्मशानघाट में भर जाता है। इससे लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। वार्ड पार्षद मोहन कुमार साहू ने बताया कि मुक्तिधाम सौंदर्गीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है, स्वीकृति मिलते ही कार्य कराया जाएगा।
