पैरों के नीचे रेंग रही अनजान दुनिया! मिजोरम की पहाड़ियों में 15 साल से छिपा ‘पाताल का जीव’,

मिजोरम के घने जंगलों और पहाड़ियों में आज भी ऐसे कई जीव मौजूद हैं जिनके बारे में इंसान बहुत कम जानता है. इसी कड़ी में वैज्ञानिकों को एक ऐसा सांप मिला है जिसे अब तक कोई पहचान नहीं पाया था. यह सांप जमीन के नीचे रहने वाला, रात में निकलने वाला और आकार में बेहद छोटा है. इसी वजह से यह सालों तक लोगों और वैज्ञानिकों की नजरों में नही आया था. इस सांप की कहानी साल 2008 से शुरू हुई, उस समय मिजोरम यूनिवर्सिटी के कैंपस में इसका पहला नमूना मिला था. शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली किसी जानी-पहचानी प्रजाति से जुड़ा होगा. जब इसकी गहराई से जांच की गई तो मामला अलग ही निकला.

प्रोफेसर एच.टी. लालरेमसांगा और उनकी टीम ने मिजोरम के कई इलाकों जैसे आइजोल, रेइक, सिहफिर, सॉलेन्ग, मामित और कोलासिब से इसके सैम्पल्स जुटाए. इसके बाद भारत के साथ-साथ रूस, जर्मनी और वियतनाम के वैज्ञानिकों ने मिलकर इसका DNA टेस्ट किया. करीब 15 साल की मेहनत के बाद साफ हुआ कि यह सांप अपनी नजदीकी प्रजातियों से करीब 15 फीसदी तक अलग पाया गया. यहीं से यह तय हो गया कि यह एक बिल्कुल नई प्रजाति है.

नई प्रजाति का नाम मिजोरम राज्य के नाम पर कैलामेरिया मिजोरामेंसिस रखा गया है. यह रीड स्नेक यानी Calamaria परिवार से जुड़ा है. इस जीन्स में दुनिया भर में अब तक 69 प्रजातियां जानी जा चुकी हैं. ये सभी बहुत छिपकर रहने वाली होती हैं. कैलामेरिया मिजोरामेंसिस का आकार काफी छोटा होता है. इसकी लंबाई करीब 20 से 30 सेंटीमीटर के बीच पाई गई है. इसका शरीर पतला और चिकना होता है. रंग भूरा-ग्रे जैसा है और आंखें भी काफी छोटी होती हैं. इस सांप से इंसानों के लिए बिल्कुल खतरनाक नहीं है.

इस सांप को ‘अदृश्य’ इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि यह ज्यादातर जमीन के नीचे रहता है. रात में ही बाहर निकलता है. यह कीड़े-मकोड़ों को खाता है. इंसानी बस्तियों से दूर रहता है. यही कारण है कि दशकों तक यह किसी की नजर में नहीं आया. वैज्ञानिकों का कहना है कि जंगलों की कटाई और इंसानों की एक्टिविटी से ऐसी गुप्त प्रजातियों पर खतरा बढ़ रहा है. अगर समय रहते संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो कई अनजाने जीव हमेशा के लिए गायब हो सकते हैं.

इस खोज से सिर्फ एक नए सांप की पहचान तक सीमित नहीं है. इससे मिजोरम और पूरे नॉर्थईस्ट भारत की जैव विविधता को नई पहचान मिली है. शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने मिजोरम में पाए जाने वाले उभयचरों और सरीसृपों की एक नई सूची भी तैयार की है. इसमें कुल 169 प्रजातियां दर्ज की गई हैं. जिनमें 52 उभयचर और 117 सरीसृप शामिल हैं.