दुनिया की सबसे रंगीन चिड़ियां, शरीर पर मौजूद हैं सारे रंग
प्रकृति की गैलरी में कुछ पक्षी ऐसे हैं जिन्हें देखकर लगता है कि कलाकार ने सारे रंग खर्च कर दिए हैं. ऐसा ही एक पक्षी है कोकोनट लोरीकीट (Coconut Lorikeet). इसे दुनिया की सबसे रंगीन चिड़ियों में से एक माना जाता है. इसके पंखों पर नीला, हरा, लाल, पीला, नारंगी और बैंगनी रंगों का ऐसा कमाल का मेल है कि इसे देखकर आंखें ठहर जाती हैं. कोकोनट लोरीकीट का शरीर चमकीले हरे रंग का होता है जबकि सिर और छाती लाल-नारंगी, पंखों के किनारे नीले और पीले निशान वाले होते हैं. ये रंग ना सिर्फ सुंदरता के लिए बल्कि जंगल में छिपने और साथियों को आकर्षित करने में भी मदद करते हैं. घने जंगलों और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ये आसानी से छिप जाते हैं लेकिन उड़ते समय उनके रंग चमक उठते हैं.
सामान्य तोतों की तरह यह बीज नहीं खाता. इसके बजाय यह फूलों का नेक्टर (रस) पीने में माहिर है. इसकी जीभ ब्रश की तरह होती है जिसके सिरे पर छोटे-छोटे बाल जैसे रेशे हैं, यह जीभ फूल में डालकर रस को चूस लेती है. इसके अलावा यह फल, नारियल का रस और कुछ कीड़े भी खा लेता है. नाम के मुताबिक यह कोकोनट (नारियल) के फूलों और फलों का बहुत शौकीन है. कोकोनट लोरीकीट ऑस्ट्रेलिया, न्यू गिनी, इंडोनेशिया और सोलोमन द्वीप समूह में पाया जाता है. ये जोड़ों या छोटे झुंडों में रहते हैं. ये बेहद चहकने वाले और सक्रिय पक्षी हैं. दिन भर फूलों से फूलों पर उड़ते रहते हैं. ये घोंसले पेड़ों के खोखले हिस्सों या चट्टानों की दरारों में बनाते हैं.
मादा लोरीकीट दो से तीन अंडे देती है. माता-पिता दोनों मिलकर अंडों को सेते हैं और बच्चों को खिलाते हैं. छोटे बच्चे शुरू में बिना पंखों वाले और कमजोर होते हैं लेकिन जल्दी ही मां-बाप की तरह रंगीन बन जाते हैं. ये पक्षी परागण (pollination) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. फूलों से रस पीते समय परागकण उनके शरीर पर चिपक जाते हैं और दूसरे फूल तक पहुंच जाते हैं. इस तरह ये जंगल की जैव विविधता बनाए रखने में मदद करते हैं.
शहरीकरण, जंगलों की कटाई और पालतू पक्षी व्यापार के कारण इनकी संख्या कुछ क्षेत्रों में घट रही है. कई देशों में इनकी सुरक्षा के लिए कानून बने हैं. भारत में इन्हें मुख्य रूप से चिड़ियाघरों या पक्षी प्रेमियों के जरिए देखा जा सकता है.
