कुतुब मीनार से भी ज्यादा गहराई! धरती के नीचे बने हैं दुनिया के ये सबसे गहरे मेट्रो स्टेशन
दुनिया में मेट्रो का सफर आमतौर पर शहर की भीड़ और ट्रैफिक से बचने का आसान तरीका माना जाता है. लेकिन कुछ जगहों पर मेट्रो स्टेशन जमीन के नीचे इतनी गहराई में बनाए गए हैं कि वहां पहुंचना किसी सफर से कम नहीं लगता. इन स्टेशनों की गहराई कई बड़ी इमारतों की ऊंचाई को भी पीछे छोड़ देती है. इनमें चीन, यूक्रेन और उत्तर कोरिया के कुछ स्टेशन खास तौर पर चर्चा में रहते हैं.
चीन के चोंगकिंग शहर का होंगयानकुन स्टेशन दुनिया के सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों में सबसे ऊपर आता है. इसकी गहराई करीब 116 मीटर बताई जाती है, जबकि यात्रियों के खड़े होने वाला प्लेटफॉर्म सतह से लगभग 106 मीटर नीचे है.
चोंगकिंग का पहाड़ी इलाका इस स्टेशन की गहराई की बड़ी वजह है. यहां जमीन का स्तर कई जगह काफी ऊंचा-नीचा है, इसलिए मेट्रो लाइन को शहर के नीचे काफी गहराई में ले जाना पड़ा. स्टेशन की ऊंचाई में लगभग 141 मीटर तक का अंतर भी इसे इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल बनाता है.
कीव का आर्सेनलना स्टेशन करीब 105.5 मीटर नीचे स्थित है. कई सालों तक इसे दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन माना जाता था. स्टेशन तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लंबे एस्केलेटर से नीचे जाना पड़ता है. इसकी गहराई का संबंध कीव के ऊंचे भू-भाग और नीपर नदी के आसपास की भौगोलिक स्थिति से है.
उत्तर कोरिया की प्योंगयांग मेट्रो भी दुनिया की सबसे गहरी परिवहन प्रणालियों में शामिल है. इसके ट्रैक की गहराई 110 मीटर से ज्यादा बताई जाती है. इसकी कई स्टेशन संरचनाएं इतनी गहरी हैं कि इन्हें जरूरत पड़ने पर सुरक्षा और आश्रय के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
कीव का झोलोती वोरोता स्टेशन करीब 96.5 मीटर की गहराई पर है. गहराई के अलावा इसकी खूबसूरत सजावट भी लोगों का ध्यान खींचती है. स्टेशन के अंदर कीवियन रूस के इतिहास और संस्कृति से प्रेरित कई मोजाइक देखने को मिलते हैं.
चोंगकिंग का होंगतूदी स्टेशन भी दुनिया के गहरे मेट्रो स्टेशनों में शामिल है और इसकी गहराई करीब 94 मीटर से ज्यादा बताई जाती है. यह स्टेशन शहर की जटिल पहाड़ी भौगोलिक संरचना के बीच बनाया गया है.
इन स्टेशनों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आधुनिक मेट्रो सिर्फ जमीन के ऊपर ट्रैक बिछाने का काम नहीं है. कहीं पहाड़ों और नदियों की वजह से, तो कहीं शहर की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इंजीनियरों को धरती के कई मीटर नीचे जाकर सुरंगें और स्टेशन बनाने पड़े. यही वजह है कि दुनिया के ये गहरे मेट्रो स्टेशन आज परिवहन के साथ-साथ इंजीनियरिंग के शानदार उदाहरण भी माने जाते हैं.
