16वीं मंजिल से संदिग्ध हालत में गिरकर युवती की मौत, परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का लगाया आरोप
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थानाक्षेत्र निवासी 18 वर्षीय युवती की मंगलवार तड़के करीब छह बजे सोसायटी की 16वीं मंजिल से संदिग्ध हालत में गिरकर मौत हो गई। हादसा अहिंसाखंड एक स्थित जयपुरिया सनराइज ग्रींस सोसायटी के सी ब्लॉक टावर में हुआ। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया। इस वजह से परिजनों ने शव नहीं उठने दिया। करीब पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस अधिकारियों की ओर से सख्त कार्रवाई के आश्वासन पर ही परिजन माने। शाम को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। हालांकि पुलिस को अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
पुलिस ने बताया कि युवती के पिता सोसायटी में कार धुलाई और कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते हैं। पिता की मदद के लिए युवती अपने भाई-बहन के साथ अक्सर सोसायटी में आ जाते थे। मंगलवार सुबह 5:30 बजे युवती अपने पिता के साथ सोसायटी पहुंची। पिता कार की सफाई करने चले गए। युवती सोसायटी के वॉशरूम में गई। वहां से सी ब्लॉक के सी टावर स्थित लिफ्ट में 5:53 बजे दाखिल हुई और 16वीं मंजिल पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों में युवती लिफ्ट में अकेली जाती दिखाई दी है। तड़के 5:55- 5:56 बजे पर सी ब्लॉक के बाहर दूसरे टावर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में युवती गिरते हुए दिखाई दी है।
घटना के बाद निवासियों ने आरडब्ल्यूए और पुलिस को सूचना दी। युवती के गिरने की सूचना सोसायटी में उनके पिता को मिली तो वह मौके पर पहुंचे और परिजनों को भी बुला लिया। उधर, सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। युवती के फटे कपड़ों को देखकर परिजन भड़क गए और दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाते हुए शव नहीं उठने दिया। देखते ही देखते हंगामा और भीड़ बढ़ती गई। पांच घंटे बाद पुलिस ने किसी तरह परिजनों को समझाया और सुबह 11 बजे शव को पोस्टमार्टम भेजा जा सका। हालांकि युवती के परिजन, रिश्तेदार समेत अन्य लोग सोसायटी में ही धरना देकर कार्रवाई की मांग करते रहे।
युवती 12वीं पास है और इस बार स्नातक में दाखिला लेने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी थी। युवती समेत परिवार में पांच बहन-भाई और माता-पिता हैं। वह पुलिस भर्ती की तैयारी करते हुए शारीरिक परीक्षा के लिए हर रोज दौड़ भी लगाती थी। कई बार दौड़ लगाते हुए वह पिता की मदद के लिए सोसायटी भी पहुंच जाती थी। इसलिए सोसायटी जाना उनके लिए कोई नई बात नहीं थी।
हादसे के बाद हुए हंगामे के कारण सोसायटी में लोगों का रोजमर्रा का काम भी प्रभावित हुआ। युवती के साथ हुई घटना के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे परिजनों ने सोसायटी में घरेलू सहायिकाओं को भी नहीं आने दिया। कई घरेलू सहायिकाओं ने फ्लैट मालिकों को फोन करके बुलाया तो इस दौरान पीड़ित परिजन और निवासियों के बीच नोकझोंक भी हुई। हालांकि कुछ कामगारों को ही सोसायटी में प्रवेश करने दिया गया।
