अंटार्कटिका में गिरा था चांद का टुकड़ा!

भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने चांद पर तिरंगा लहराकर इतिहास तो रचा ही था, लेकिन अब उसके प्रज्ञान रोवर ने एक ऐसा वैज्ञानिक धमाका किया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को सोच में डाल दिया है. चांद के साउथ पोल पर मौजूद ‘शिव शक्ति पॉइंट’ (जहां विक्रम लैंडर उतरा था) की मिट्टी का सीधा कनेक्शन धरती के सबसे ठंडे इलाके यानी अंटार्कटिका से मिला है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि लाखों साल पहले अंटार्कटिका में गिरा चांद का एक टुकड़ा और शिव शक्ति पॉइंट की मिट्टी रासायनिक रूप से एक जैसे हैं.

साल 1982 में वैज्ञानिकों को अंटार्कटिका के एलन हिल्स इलाके में एक अनोखा उल्कापिंड मिला था, जिसे नाम दिया गया था ‘ALHA 81005’. यह असल में चांद का एक टुकड़ा था जो करीब 10 लाख साल पहले किसी टकराव के कारण टूटकर धरती पर आ गिरा था. अब फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के डेटा की मदद से यह साबित किया है कि इस पत्थर की रासायनिक बनावट चांद के शिव शक्ति पॉइंट की मिट्टी से हूबहू मिलती है.

यह बड़ा खुलासा प्रज्ञान रोवर में लगे एक खास उपकरण ‘अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर’ (APXS) की वजह से संभव हो पाया है. इस यंत्र का काम चांद की सतह पर मौजूद रसायनों की जांच करना था. जांच में सामने आया कि शिव शक्ति पॉइंट की मिट्टी में एल्युमिनियम की कमी है, जबकि आयरन (लोहा) और मैग्नीशियम की मात्रा बहुत ज्यादा है. ठीक यही अनोखा मिश्रण अंटार्कटिका वाले उल्कापिंड में भी पाया गया था, जिसमें 25.8% एल्युमिनियम ऑक्साइड और 13.7% आयरन-मैग्नीशियम ऑक्साइड मौजूद है. चांद की ऊपरी सतह पर अक्सर छोटे-मोटे उल्कापिंड टकराते रहते हैं जिससे वहां की मिट्टी आपस में मिल जाती है. लेकिन शिव शक्ति पॉइंट की मिट्टी में कुछ ऐसा मिला है जो चांद के गहरे हिस्सों (internal layers) में पाया जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद के पास स्थित सौरमंडल का सबसे बड़ा और गहरा गड्ढा ‘साउथ पोल-ऐटकेन बेसिन’ इसका कारण हो सकता है. जब प्राचीन काल में कोई विशाल आकाशीय पिंड वहां टकराया होगा, तो चांद के सीने को चीरते हुए अंदरूनी लावा और खनिज बाहर बिखर गए होंगे.

इस खोज ने विज्ञान की एक बहुत पुरानी थ्योरी को सच साबित कर दिया है जिसे ‘लूनर मैग्मा ओशन थ्योरी’ कहा जाता है. इस थ्योरी के अनुसार, शुरुआती दिनों में चांद पूरी तरह से पिघले हुए लावे का एक समंदर था. जैसे-जैसे यह ठंडा हुआ, भारी तत्व नीचे बैठ गए और हल्के तत्व ऊपर आ गए. शिव शक्ति पॉइंट से मिले केमिकल सबूतों ने यह साफ कर दिया है कि चांद का इतिहास बिल्कुल वैसा ही था जैसा वैज्ञानिक सोचते थे.

यह खोज सिर्फ एक पुरानी पहेली को सुलझाने तक सीमित नहीं है. इससे भविष्य में चांद पर जाने वाले इंसानी और रोबोटिक मिशनों को बहुत मदद मिलेगी. अब वैज्ञानिकों को पता चल गया है कि चांद की गहराई में छिपे कीमती खनिजों को खोजने के लिए उन्हें किन जगहों पर खुदाई या रिसर्च करनी चाहिए. भारत के चंद्रयान-3 ने दुनिया को चांद को देखने का एक बिल्कुल नया नजरिया दे दिया है.