एक पहिए की साइकिल से 11000 KM का सफर… केरल से नेपाल के रास्ते में है शख्स
चेहरे पर आत्मविश्वास की चकम लिए एक शख्स फिल्म जैसा स्टंट करते हुए केरल से नेपाल के सफर पर निकला है. उसके हाथ में साइकिल की हैंडल है, जो आधी है. यानी ऐसी साइकिल, जिसमें सिर्फ पीछे वाला पहिया है. यह एक माडिफाइड साइकिल है, जिसका का अगला हिस्सा उठाए, सड़क पर बैलेंस बनाकर चलाते हुए ये शख्स सफर कर रहा है और नेपाल उसका डेस्टिनेशन है. ये केरल केरल के साइकिलिस्ट सनीद हैं, जिन्होंने साइकिल के जरिए ग्यारह हजार किलोमीटर की यात्रा करने की ठानकर निकले हैं.
केरल के साइक्लिस्ट सनीद का यह सफर ड्रग्स के खिलाफ मुहिम का हिस्सा है. उनका मानना है कि नशीले पदार्थों का बहिष्कार होना चाहिए. वे ‘Say No to Drugs’ का संदेसा लेकर निकल पड़े हैं और नेपाल के रास्ते में हैं. उन्होंने कश्मीर तक अपनी राइड पूरी कर ली है. सनीद कहते हैं, “मैंने बिना अगले पहिये के केरल से कश्मीर तक की राइड पूरी की है. मैं केरल से एवरेस्ट बेस कैंप जा रहा हूं.”
#WATCH | Tiruchirappalli: Kerala cyclist, Saneed, rides 11,000 km from Kerala to Nepal on a bicycle without a front wheel to spread the message – ‘Say No to Drugs’.
He says, “I completed a ride from Kerala to Kashmir without a front wheel, and now I am going from Kerala to… pic.twitter.com/95agDos8d3— ANI (@ANI) August 19, 2026
सनीद सिविल इंजीनियरिंग और इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और प्रोफेशनल बाइक स्टंटर भी हैं. वे बताते हैं कि हम इंडियन आर्मी को उनकी परेड के स्टंट्स के लिए ट्रेनिंग देते हैं.
सनीद कहते हैं कि अब तक मैंने 7,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर ली है. मैं हर रोज औसतन 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करता हूं, और एक दिन में सबसे ज्यादा 150 किलोमीटर तक चला हूं. यह पूरी तरह से सड़क की हालत और मौसम पर निर्भर करता है. इस इलाके में तेज हवाओं की वजह से बैलेंस बनाना बहुत मुश्किल होता है.
सनीद कहते हैं, “आम साइकिलिंग के मुकाबले बिना अगले पहिये के राइडिंग करना बहुत मुश्किल है, लेकिन मुझे 12 साल का एक्सपीरिएंस है. मैं केरल, तमिलनाडु और पूरे भारत में ड्रग्स के इस्तेमाल के खिलाफ संदेश फैलाना चाहता हूं, जिससे लोगों को दिखा सकूं कि कुछ अलग करने के लिए ड्रग्स की जरूरत नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा कि वही करें, जिससे आपको खुशी मिले. अपनी जिदगी बर्बाद न करें. अगर मेरा सफर किसी एक शख्स को भी अपनी सोच बदलने के लिए मोटिवेट करता है, तो वही मेरा असली वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा.
