बंगाल के फालता में पहली बार भाजपा जीती, CPI(M) कैंडिडेट को 1.09 लाख वोटों से हराया

पश्चिम बंगाल की फालता सीट पर रविवार को आए चुनावी नतीजे में भाजपा को जीत मिली। बीजेपी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने 1 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। उन्हें 1.49 लाख से ज्यादा वोट मिले। CPI(M) के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी 40 हजार वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे। वहीं चुनाव से पीछे हटने वाले TMC के जहांगीर चौथे नंबर पर रहे। फालता में 74 साल के इतिहास में भाजपा ने पहली बार जीत हासिल की है। 1952 से 2006 तक यह कांग्रेस और CPI(M) का गढ़ था। 2011 के बाद लगातार तीन बार टीएमसी जीती थी। फालता में जीत के साथ भाजपा की बंगाल में कुल सीटें 208 हो गईं हैं। 4 मई को आए रिजल्ट में भाजपा को 207 सीटें मिलीं थीं। टीएमसी के खाते में सिर्फ 80 सीटे हैं।

पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर हुए चुनाव में फालता में सबसे बड़े अंतर से जीत का रिकॉर्ड बना। देबांग्शु ने 1,09,021 के अंतर से जीत दर्ज की। उनका वोट शेयर 71% रहा। इससे पहले 4 मई को आए नतीजे में मातिगारा-नक्सलबाड़ी सीट से भाजपा के आनंदमय बर्मन ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 104,265 वोटों के अंतर से हराया था। यानी कि इस चुनाव में सबसे ज्यादा मार्जिन से दो बड़ी जीतें भाजपा के नाम ही हैं।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया X पर लिखा- फालता के लोगों ने अपना फैसला सुना दिया है। लोकतंत्र की जीत हुई है और डराने-धमकाने वाली ताकतों की हार। फालता में रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल करने के लिए देबांग्शु पांडा जी को बधाई। यह पश्चिम बंगाल की जनता का BJP के प्रति अटूट विश्वास दर्शाता है।

फालत साउथ 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है। जिले में कुल 31 सीटे हैं। फालता को मिलाकर बीजेपी ने यहां 11 सीटें जीत लीं। फालता, सागर, काकद्वीप, गोसाबा और सोनारपुर के साथ जादवपुर, टॉलीगंज, बेहला पूर्व-पश्चिम जैसे शहरी इलाकों में भी बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की। हालांकि बासंती, कुलतली, रायदीघी और बजबज जैसी सीटों पर TMC अपनी पकड़ बचाने में सफल रही।

फालता में 285 बूथों पर 21 मई को दोबारा मतदान कराया गया था। रीपोलिंग में वोटिंग करीब 2% बढ़ गई। चुनाव आयोग के मुताबिक यहां 88.13% मतदान हुआ। इससे पहले, 29 अप्रैल को इसी सीट पर 86.71% मतदान हुआ था। आधिकारिक तौर पर इस सीट के लिए छह उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने दोबारा मतदान से कुछ दिन पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि, उनकी ओर से ये बात लिखित में दिए जाने की सूचना नहीं थी। रीपोलिंग के दौरान EVM में उनका नाम और सिंबल मौजूद था।