पत्थर खाकर जिंदा रहता था ये जीव ! रेगिस्तानी चट्टानों में मिली सुरंगों ने खोल दिया राज, वैज्ञानिक हैरान
नामीबिया, ओमान और सऊदी अरब के रेगिस्तानी इलाकों में चूना पत्थर और संगमरमर की चट्टानों के अंदर ये अजीब सुरंगें पाई गई हैं. ये सुरंगें जमीन की सतह पर नजर नहीं आतीं हैं. चट्टानों को काटने पर इनके साफ निशान दिखते हैं. वैज्ञानिकों की रिसर्च अब इस ओर इशारा कर रही है कि कभी धरती के अंदर ऐसी जिंदगी रही होगी जो पत्थर को ही खाकर जिंदा थी. 15 साल पहले जर्मनी की जोहान्स गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक सीस पास्कियर ने रेगिस्तान की संगमरमर चट्टानों में पतली-पतली सीधी लकीरें देखीं थीं. जांच में पता चला कि ये लकीरें असल में बहुत छोटी सुरंगें हैं. चौड़ाई करीब आधा मिलीमीटर. गहराई तीन सेंटीमीटर तक है. ऐसी ही संरचनाएं दूसरे रेगिस्तानी इलाकों में भी पाई गईं. वैज्ञानिक इसलिए हैरान हैं क्योंकि ये सुरंगें न तो टूट-फूट से बनी लगती हैं. न ही किसी प्राकृतिक दबाव का नतीजा हैं. हर सुरंग सीधी खड़ी हैं. एक जैसी दूरी पर है. एक तय गहराई तक ही जाती है. ये अक्सर चट्टानों की दरारों से शुरू होती हैं जैसे किसी ने कमजोर जगह देखकर वहीं से काम शुरू किया हो. रिसर्चर्स ने पहले यह जांचा कि कहीं ये पानी, हवा या जमीन के हिलने से तो नहीं बनीं हैं. सभी गैर-जीव कारणों को खारिज कर दिया गया. इसके बाद वैज्ञानिकों को शक हुआ कि इसका कारण कोई जीव हो सकता है. सीस
सुरंगों के अंदर एक पतली परत मिली है. वह आसपास की चट्टान से अलग थी. इसमें लोहे, मैंगनीज और कुछ दूसरे तत्व बहुत कम मात्रा में थे. इससे साफ हुआ कि यह किसी चुनिंदा प्रोसेस का नतीजा है. इसके अलावा कार्बन और ऑक्सीजन के निशान भी अलग तरह के मिले हैं, जो बताते हैं कि यहां कभी जैविक गतिविधि हुई थी.
रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी नाम की जांच में सुरंगों के अंदर जले हुए जैविक कणों के निशान पाए गए हैं. साथ ही फॉस्फोरस और सल्फर भी पाए गए. यह आमतौर पर जीवों की कोशिकाओं में होते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव पत्थर को घोलने वाले अम्ल छोड़ता था और आगे बढ़ता जाता था. बता दें कि इन सुरंगों की सबसे हैरान करने वाली बात इनका पैटर्न है. कोई भी सुरंग दूसरी को काटती नहीं है. सब एक-दूसरे से दूरी बनाकर चलती हैं. इससे लगता है कि ये सूक्ष्म जीव किसी तरह आसपास के माहौल को महसूस कर रहे थे. पहले से बनी जगहों से बचते थे. वहीं कुछ सुरंगों में परत-दर-परत जमा हुआ मलबा भी मिला है. यह पेड़ों के छल्लों जैसा दिखता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मौसम के बदलने या नमी में फर्क का संकेत हो सकता है. इससे लगता है कि यह जीव लंबे समय तक यहां मौजूद रहा होगा. हालांकि अब वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज सिर्फ एक रहस्य नहीं बल्कि धरती के पुराने इतिहास की झलक है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि जीवन किस तरह चट्टानों और धरती की बनावट को बदल सकता है.
