अरुणाचल के जंगलों में मिला ‘घर बनाने वाला’ नन्हा जीव, इंसानों की तरह खुद बनाता है आशियाना

भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के जंगलों से जीव-जंतुओं की दुनिया से एक अजब-गजब खबर सामने आई है. भारतीय वन्यजीव संस्थान यानी WII के वैज्ञानिकों ने नामदफा टाइगर रिजर्व में मेंढक की एक नई प्रजाति की खोज की है. यह नन्हा सा जीव अपनी एक अनोखी खूबी को लेकर चर्चा में बना हुआ है. पक्षियों को घोंसला बनाते और मधुमक्खियों को छत्ता बनाते हुए तो आपने अभी तक जरूर देखा होगा, लेकिन क्या कभी किसी मेंढक को अपना घर बनाते हुए देखा है? जवाब होगा नहीं. लेकिन अरुणाचल प्रदेश में मिली यह नई प्रजाति न सिर्फ अपना घर बनाती है, बल्कि उसमें वेंटिलेशन और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखती है.

ज्यादातर मेंढक अपने अंडे पानी में या पत्तियों पर देते हैं, अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में मिली यह नई प्रजाति मिट्टी से अपना घर तैयार करती है. घने जंगलों में जमीन पर गिरी पत्तियों के नीचे यह मेंढक मिट्टी का घर तैयार करता है और वहीं अंडे देता है. भारत में इस समूह के मेंढकों में ऐसा व्यवहार पहली बार देखा गया है.

बात करें इस मेंढक के आकार की तो यह 2.3 से 3.5 सेंटीमीटर के बीच है. इसे फेंग फ्रॉग ग्रुप में रखा गया है, क्योंकि इनके निचले जबड़े में दांतों जैसे उभार होते हैं. इसकी पहचान इन खासियतों से की जा सकती है-

इसकी आंखों के बीच एक गहरी भूरी रेखा मौजूद होती है.

पीठ पर अंग्रेजी के V आकार की लकीर होती है.

शरीर के दोनों तरफ स्किन की कटी-फटी सिलवटें होती हैं.

वैज्ञानिकों ने न सिर्फ इस नई प्रजाति को खोजा है, बल्कि डीएनए टेस्ट के जरिए यह भी पता लगाया है कि चीन और म्यांमार में पाया जाने वाला मेंढक लिम्नोनेक्ट्स लॉन्गचुआनेंसिस भी भारत में मौजूद है. यह पहली बार है जब इस प्रजाति को भारत में आधिकारिक रूप में पाया गया है.

नामदफा टाइगर रिजर्व, जो चीन और म्यांमार के बार्डर से सटा हुआ है, दुनिया के सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है. जानकारों का कहना है कियह खोज बताती है कि पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो दुनिया की नजरों से ओझल है.