आसमान में दिखेगी ‘चमकती हुई अंगूठी’, 17 फरवरी को नजर आएगा ‘रिंग ऑफ फायर
17 फरवरी 2026 का दिन एस्ट्रोनॉमी लवर्स के लिए खास दिन होने वाला है. इस दिन साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होने जा रही है. इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दौरान आसमान में सूजर एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखाई देता है. हालांकि अफसोसजनक बात ये है कि इस अद्भुत नजारे को लगभग कोई भी इंसान अपनी आंखों से नहीं देख पाएगा.
लगभग कोई भी इंसान अपनी आंखों से रिंग ऑफ फायर को नहीं देख पाएंगे. दरअसल इसकी भौगोलिक स्थिति है. 17 फरवरी 2026 को होने वाले इस ग्रहण का मेन पाथ अंटार्कटिका से होकर गुजर रहा है, जो कि पृथ्वी के सबसे सुदूर और दुर्गम इलाकों में से एक है. इस मार्ग विशेष रूप से निर्जन बर्फीले मैदानों और दक्षिणी महासागर के ऊपर है. इसलिए वहीं कोई इंसान रह नहीं पाता, ऐसे में वहीं कोई स्थायी मानव बस्तियां भी नहीं है. इसलिए इसे केवल वहां मौजूद वैज्ञानिक केंद्रों में रह रहे रिसर्चर्स और वहां रहने वाले लाखों पेंगुइन ही देख पाएंगे. ऐसे में इस मजाक में ‘पेंगुइन का ग्रहण’ भी कहा जाता है.
रिंग ऑफ फायर को समझने के लिए पहले आपको समझना होगा कि सूर्य ग्रहण कैसे होता है? आपको बता दें, जब चंद्रमी, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तब सूर्य ग्रहण होता है. ऐसे में ‘वलयाकार’ या ‘रिंग ऑफ फायर’ ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी सबसे दूर की कक्षा के करीब होता है. इसी दूरी के कारण चंद्रमा साइज में सूर्य से छोड़ा छोटा दिखाई देता है और उसे पूरी तरह ढक नहीं पाता. इसका नतीजा ये होता है कि चंद्रमा के चारों ओर सूरज का बाहरी हिस्सा एक चमकदार छल्ले या अंगूठी की तरह चमकने लगता है. ‘रिंग ऑफ फायर’ केवल अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में ही दिखाई देगा. ऐसे में यह दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना के दक्षिणी हिस्से, चिली और हिंद महासागर के कुछ द्वीपों में ये ‘आंशिक सूर्य ग्रहण’ के रूप में दिखेगा, जहां सूरज का एक हिस्सा कटा हुआ नजर आएगा. वहीं भारत या एशिया के लोगों के लिए इस बार का ‘रिंग ऑफ फायर’ काफी अफसोसजनक है, क्योंकि ये ग्रहण भारत या एशिया के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देने वाला है.
साइंटिस्ट का कहना है कि ‘रिंग ऑफ फायर’ को देखते समय कुछ सावधानी बरतने की जरूरत होती है. भले ही यह बहुत कम लोग देख पाएंगे, लेकिन जो भी इसे देख रहे हों, उन्हें कभी भी नग्न आंखों से सूरज की ओर नहीं देखना चाहिए. इसके लिए खास प्रमाणित सोलर चश्मों का इस्तेमाल करना जरूरी है, वरना आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंच सकता है. अगर आप इस घटना को देखना चाहते हैं, तो दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां और वेधशालाएं इसका सीधा प्रसारण करेंगी, जिसके जरिए आप घर बैठे भी इस ‘कॉस्मिक रिंग’ को देख सकेंगे.
