रुपये ने पकड़ी मजबूती… डॉलर के मुकाबले 15 पैसे चढ़ा, आगे क्या रहेगा रुख?

भारतीय रुपये ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले गिरावट का सिलसिला थामते हुए मजबूती दर्ज की. पिछले कारोबारी सत्र में 95.96 के स्तर पर बंद हुआ रुपया सोमवार को 95.81 पर पहुंच गया. यानी रुपये में 15 पैसे की बढ़त रही. कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया. इसके अलावा घरेलू शेयर बाजार की तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी से भी भारतीय रुपये को सपोर्ट मिला.

इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया सोमवार को 95.86 के स्तर पर खुला. कारोबार के दौरान इसमें और मजबूती आई और यह 95.72 के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया. हालांकि बाद में कुछ बढ़त कम हुई और रुपया 95.81 पर बंद हुआ. इससे पहले 18 सितंबर को रुपया 7 पैसे कमजोर होकर 95.96 के स्तर पर बंद हुआ था. रुपये ने सोमवार की चाल में न सिर्फ शुक्रवार की गिरावट की भरपाई की, बल्कि डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति भी थोड़ी मजबूत की.

फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में ऊंचे स्तर से आई गिरावट रुपये के लिए सकारात्मक रही. भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से का कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में नरमी से देश के इम्पोर्ट बिल पर प्रेशर कम हो सकता है और डॉलर की मांग घट सकती है. इसी उम्मीद का फायदा रुपये को मिला.

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि ऊंचे स्तरों से कच्चे तेल में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल जोखिम भावना में सुधार हुआ है. इससे रुपये को हल्का सपोर्ट मिला. उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है, जो रुपये के लिए सकारात्मक हो सकता है.

रुपये की मजबूती में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की उम्मीद का भी योगदान रहा. अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो ग्लोबल मार्केट में निवेशकों की चिंता कुछ कम हो सकती है. हालांकि, इस मोर्चे पर जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अनुज चौधरी के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने की रिपोर्ट फिर से बाजार के रिस्क सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती है. ऐसे किसी घटनाक्रम से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है.

डॉलर इंडेक्स सोमवार को 100.32 के स्तर पर था और इसमें 0.10 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. इसके बावजूद रुपये में मजबूती देखने को मिली. वहीं, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.08 फीसदी गिरकर 101.71 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी रुपये के लिए अहम सपोर्ट बनी. अनुज चौधरी के मुताबिक, आने वाले समय में USD-INR स्पॉट 95.55 से 96.05 के दायरे में रह सकता है.

भारतीय शेयर बाजार में भी सोमवार को अच्छी तेजी रही. सेंसेक्स 564.03 अंक चढ़कर 74,858.99 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 67.90 अंक की बढ़त के साथ 23,414.30 के स्तर पर पहुंच गया. शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी भी देखने को मिली. एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में नेट बेसिस पर ₹599.54 करोड़ की इक्विटी खरीदी थी. घरेलू बाजार में तेजी और विदेशी निवेश से जुड़ी सकारात्मक धारणा भी रुपये के लिए सपोर्टिव माहौल बनाने में मदद कर सकती है.

हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी अलग रही. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 18 सितंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 11 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 4.924 अरब डॉलर घटकर 780.782 अरब डॉलर रह गया.

इस दौरान विदेशी मुद्रा और गोल्ड रिजर्व में गिरावट दर्ज की गई. यानी रुपये की सोमवार की मजबूती के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार में कमी एक ऐसा आंकड़ा है, जिस पर बाजार की नजर बनी रहेगी.

आने वाले कारोबारी सत्रों में रुपये की चाल कई वैश्विक संकेतों से तय होगी. सबसे पहले नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी. अगर तेल ऊंचे स्तर से और नीचे आता है, तो इससे रुपये को राहत मिल सकती है. इसके अलावा अमेरिका-ईरान बातचीत की स्थिति, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी खबरें और डॉलर इंडेक्स भी रुपये की चाल के लिए अहम होंगे. फिलहाल सोमवार की तस्वीर रुपये के लिए सकारात्मक रही.