नेतन्याहू को ट्रंप ने फिर हड़काया, रुकी ईरान-इजरायल की जंग, जून तक हो जाएगी डील

ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य हमलों का सिलसिला फिलहाल थम गया है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव अब भी बना हुआ है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इजरायल उसकी या उसके सहयोगियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई जारी रखता है, खासतौर पर लेबनान में, तो वह फिर से जवाबी हमले शुरू कर सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कथित तौर पर चेतावनी दी है कि वे सावधानी बरतें. अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि अगर इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण ईरान के साथ हुआ युद्धविराम टूटता है, तो उसे भविष्य में अमेरिका का पूरा समर्थन नहीं मिल सकता.

ईरान के संसद अध्यक्ष और अमेरिका के साथ वार्ता में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने कहा कि कागजों पर मौजूद युद्धविराम का कोई वास्तविक महत्व नहीं है, क्योंकि जमीनी स्तर पर लगातार उल्लंघन होते रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष की ओर से बार-बार समझौते का उल्लंघन किया गया और भरोसा कायम करने की कोई वास्तविक इच्छा दिखाई नहीं दी.
दूसरी ओर अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर को निशाना बनाकर निष्क्रिय कर दिया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह जहाज ईरान के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था. अमेरिका ने यह भी कहा कि अप्रैल में ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद अब तक सात जहाजों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जा चुकी है.
वहीं लेबनान में भी हिंसा जारी है. सोमवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला और एक बच्चा भी शामिल हैं. इसके अलावा चार पैरामेडिक कर्मी घायल हुए हैं. मार्च से अब तक लेबनान में इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या 3,637 तक पहुंच गई है.
इस बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने 1967 में अमेरिकी नौसेना के जहाज यूएसएस लिबर्टी पर हुए हमले की नई जांच की मांग की है. उस हमले में 34 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी और 170 से अधिक घायल हुए थे. यह घटना आज भी अमेरिका-इजरायल संबंधों के इतिहास के सबसे विवादित मामलों में गिनी जाती है.